ये ज़रूरी तो नहीं ...preet
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हर राहगीर रहबर बन जाए,ये ज़रूरी तो नहीं !
हर इशक वादे भी निभाए,ये ज़रूरी तो नहीं !
मेरे ही गिरेबान में घुस कर,मेरे साथी बन कर!
छुरी लोग मुझ पे न चलाएँ,ये ज़रूरी तो नहीं !
सांप की है डंक फितरत,डंक ही तो मारेगा!
और ज़हर असर भी दिखाए,ये ज़रूरी तो नहीं !
झड़ते पत्तों को है चिंता,नए क्यों शिखर छु गए ?
गुरु से चेला आगे न जाए,ये ज़रूरी तो नहीं !
हम तो हर पल मुस्कुराते,खिले फूल से दोस्तों!
आदत ये हर किसी को भाए,ये ज़रूरी तो नहीं !...preet
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